स्वास्थ्य सेवा को सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम में, स्वास्थ्य मंत्रालय ने टेलीमेडिसिन सेवाओं का 200 जिलों में विस्तार किया है, जिससे ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्रामीण मरीज विशेषज्ञों से जुड़ सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य शहरी-ग्रामीण स्वास्थ्य अंतर को पाटना है।
🔹 राष्ट्रव्यापी टेलीमेडिसिन नेटवर्क
ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म, जो डॉक्टर-से-डॉक्टर और मरीज-से-डॉक्टर परामर्श को सक्षम बनाता है, अब 200 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों में शुरू कर दिया गया है। 15,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी, सीएचसी) को वीडियो परामर्श की सुविधा के लिए टैबलेट और हाई-स्पीड इंटरनेट से लैस किया गया है। जनवरी 2024 से अब तक 2.8 मिलियन परामर्श किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य सचिव का बयान
"हम एक 'हब एंड स्पोक' मॉडल बना रहे हैं जहां जिला अस्पताल विशेषज्ञों के साथ हब के रूप में कार्य करते हैं, और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्पोक बन जाते हैं। एक दूरदराज के गांव का मरीज अब 100 किमी यात्रा किए बिना विशेषज्ञ की राय ले सकता है।" – अपूर्व चंद्रा।
शामिल विशेषताएं
- जनरल मेडिसिन: बुखार, संक्रमण, पुरानी बीमारियां।
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य: उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था परामर्श, बाल चिकित्सा देखभाल।
- मानसिक स्वास्थ्य: वीडियो के माध्यम से परामर्श सत्र।
- त्वचा विज्ञान: छवि साझाकरण के माध्यम से त्वचा की स्थिति।
- कार्डियोलॉजी और डायबिटोलॉजी: अनुवर्ती परामर्श।
🔹 प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण
प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र को एक टेलीमेडिसिन किट (टैबलेट, बीपी मॉनिटर, ऑक्सीमीटर और डर्मास्कोप जैसे नैदानिक उपकरण) प्रदान किए गए हैं। सॉफ्टवेयर 12 भाषाओं का समर्थन करता है और कम बैंडविड्थ पर काम करता है। 25,000 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को परामर्श के दौरान रोगियों की सहायता करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
केस स्टडी: छत्तीसगढ़ की सफलता
बस्तर के आदिवासी जिले में, टेलीमेडिसिन ने एक विशेषज्ञ के दौरे के लिए औसत यात्रा को 120 किमी से घटाकर 2 किमी कर दिया है। "हमने एक बच्चे में रूमेटिक हृदय रोग का जल्दी निदान किया और उसे रायपुर रेफर किया। पहले, ऐसे मामले अक्सर अनदेखे रह जाते थे," जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रवि सिंह ने कहा।
🔹 आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के साथ एकीकरण
टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के साथ एकीकृत है। मरीज एक स्वास्थ्य आईडी बना सकते हैं और अपने रिकॉर्ड ऑनलाइन एक्सेस कर सकते हैं। प्रिस्क्रिप्शन डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित होते हैं और एसएमएस के माध्यम से भेजे जाते हैं। यह इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करती है कि मरीज के किसी दूसरे शहर में जाने पर भी देखभाल जारी रहे।
मरीज का अनुभव
झारखंड के एक गांव की 52 वर्षीय मंगल देवी: "मैं डॉक्टर को दिखाने के लिए बस के किराए पर ₹500 खर्च करती थी। अब मैं पंचायत भवन तक जाती हूं और स्क्रीन पर डॉक्टर से बात करती हूं। उन्होंने दवाइयां लिखीं और वे स्थानीय फार्मेसी में उपलब्ध थीं।"
🔹 चुनौतियां और अगला चरण
दूरस्थ बस्तियों में कनेक्टिविटी एक बाधा बनी हुई है। सरकार 5000 गांवों में सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट तैनात कर रही है। अगले चरण में निजी अस्पतालों को शामिल करने और 2025 तक 400 जिलों तक विस्तार करने का लक्ष्य है। तकनीकी सहायता के लिए 24x7 हेल्पलाइन भी शुरू की गई है।