2020 के बाद से सबसे बड़े ग्रामीण कनेक्टिविटी अभियान में, सरकार ने भारतनेट परियोजना के तहत 5,000 नए गांवों को जोड़ा है, जिससे देश के दूरदराज के कोनों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंच गया है। इस पहल का उद्देश्य डिजिटल विभाजन को पाटना और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और ई-गवर्नेंस में अवसरों को खोलना है।
🔹 विस्तार के मुख्य बिंदु
दूरसंचार विभाग (DoT) ने घोषणा की कि इस चरण के माध्यम से 2.5 करोड़ से अधिक ग्रामीण नागरिकों को इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। 45,000 किमी ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई गई है, और सामुदायिक केंद्रों, स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 10,000 वाई-फाई हॉटस्पॉट सक्रिय किए जा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना
"यह सिर्फ इंटरनेट कनेक्टिविटी के बारे में नहीं है - यह आकांक्षाओं को जोड़ने के बारे में है। हमने पिछले चरणों में शामिल गांवों में डिजिटल साक्षरता में 40% की वृद्धि देखी है," दूरसंचार सचिव वी. लक्ष्मी रतन ने कहा।
ई-गवर्नेंस आखिरी छोर तक पहुंचा
ग्रामीण अब 300 से अधिक सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन एक्सेस कर सकते हैं, जिसमें जाति प्रमाण पत्र, भूमि रिकॉर्ड और पेंशन आवेदन शामिल हैं। इन गांवों के कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में फाइबर रोलआउट के बाद से लेनदेन में 60% की वृद्धि दर्ज की गई है।
🔹 शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा पर प्रभाव
इन गांवों के 8,500 से अधिक सरकारी स्कूलों में अब स्मार्ट क्लासरूम हैं, जहां जिला मुख्यालयों से लाइव व्याख्यान प्रसारित होते हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में, टेलीमेडिसिन परामर्श वास्तविकता बन गया है - मरीज अब जिला अस्पतालों के विशेषज्ञों को वीडियो कॉल कर सकते हैं।
केस स्टडी: छतरपुर, मध्य प्रदेश
छतरपुर में, 30 गांवों के समूह को पिछले महीने कनेक्टिविटी मिली। स्थानीय शिक्षिका सुनीता यादव ने SKY Today को बताया: "मेरे छात्र अब एनसीईआरटी ई-कंटेंट एक्सेस कर सकते हैं और ऑनलाइन क्विज ले सकते हैं। पहली बार, वे खुद को राष्ट्रीय मुख्यधारा का हिस्सा महसूस करते हैं।"
🔹 निजी क्षेत्र की भागीदारी
रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और टाटा टेली किफायती डेटा प्लान पेश करने के लिए सरकार के साथ साझेदारी कर रहे हैं। ग्रामीण ग्राहकों के लिए एक विशेष ₹49 मासिक प्लान (2GB डेटा + असीमित वॉयस) शुरू किया गया है। इसके अतिरिक्त, 'पीएम-वाणी' योजना के तहत 5,000 ग्रामीण उद्यमियों को वाई-फाई कियोस्क चलाने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
आर्थिक प्रभाव
स्थानीय व्यवसाय तेजी से डिजिटल हो रहे हैं। आईआईएम अहमदाबाद के एक अध्ययन का अनुमान है कि ग्रामीण इंटरनेट पहुंच बेहतर बाजार पहुंच, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन कौशल के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को 18% तक बढ़ा सकती है।
🔹 आगे की चुनौतियां
हालांकि बुनियादी ढांचा मौजूद है, अधिकारी मानते हैं कि डिजिटल साक्षरता एक बाधा बनी हुई है। सरकार ने 1,500 गांवों में 'इंटरनेट साथी' कार्यक्रम शुरू किए हैं ताकि महिलाओं को डिजिटल राजदूत के रूप में प्रशिक्षित किया जा सके। दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली बैकअप एक और चिंता का विषय है; इसे संबोधित करने के लिए सौर ऊर्जा संचालित टावर तैनात किए जा रहे हैं।