केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज किसानों के लिए एक व्यापक नई नीति को मंजूरी दी जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर 2.0 और एक नए सब्सिडी ढांचे का लाभ उठाती है। 'स्मार्ट किसान योजना' का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में किसानों की आय में 25% की वृद्धि करना है।
🔹 नई नीति के मुख्य स्तंभ
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने चार मुख्य घटकों की घोषणा की: एआई-आधारित फसल सलाह, रियल-टाइम मृदा स्वास्थ्य निगरानी, सरलीकृत सब्सिडी पहुंच, और डिजिटल बाज़ार एकीकरण। यह नीति शुरू में 200 जिलों में लागू की जाएगी, जिससे 1.5 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे।
मंत्री का बयान
"यह हरित क्रांति के बाद का सबसे बड़ा सुधार है। हम हर किसान के हाथों में तकनीक दे रहे हैं—फसल चयन से लेकर उपज को सर्वोत्तम मूल्य पर बेचने तक।" – नरेंद्र सिंह तोमर।
एआई-संचालित फसल निगरानी
उपग्रह इमेजरी और एआई एल्गोरिदम का उपयोग करके, किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में एसएमएस और मोबाइल ऐप के माध्यम से कीट हमले की चेतावनी, सिंचाई कार्यक्रम और उर्वरक सिफारिशें प्राप्त होंगी। कर्नाटक और हरियाणा में पायलट प्रोजेक्ट्स ने इनपुट लागत में 18% की कमी दिखाई।
🔹 सब्सिडी में बदलाव: डीबीटी 2.0
इनपुट (उर्वरक, बीज) पर सब्सिडी देने के बजाय, सरकार सीधे किसानों के खातों में भूमि जोत और फसल पैटर्न के आधार पर पैसा हस्तांतरित करेगी। इस "किसान ई-वॉलेट" का उपयोग पंजीकृत विक्रेताओं से कोई भी स्वीकृत इनपुट खरीदने के लिए किया जा सकता है, जिससे पारदर्शिता और विकल्प सुनिश्चित होगा।
यह कैसे काम करता है
- पंजीकरण: किसानों का भूमि रिकॉर्ड और आधार के माध्यम से सत्यापन।
- आवंटन: बुवाई के मौसम से पहले प्रति एकड़ राशि जमा की जाएगी।
- लचीलापन: किसान तय करेंगे कि क्या खरीदना है—बीज, कीटनाशक, या कृषि मशीनरी किराए पर लेना।
🔹 डिजिटल मार्केटप्लेस एकीकरण
नीति इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नाम) के साथ एकीकरण को अनिवार्य बनाती है। किसान ऑनलाइन उपज की नीलामी कर सकते हैं, रियल-टाइम कीमतों का पता लगा सकते हैं और सीधे भुगतान प्राप्त कर सकते हैं। निजी मंडियों को भी शामिल किया जाएगा। वर्तमान में, ई-नाम 1,000 मंडियों को कवर करता है; 2025 तक 3,000 का लक्ष्य है।
किसानों के लिए मोबाइल ऐप
एकीकृत ऐप 'किसान मित्र' 12 भाषाओं में मौसम पूर्वानुमान, बाजार मूल्य, विशेषज्ञ सलाह और नीति अपडेट प्रदान करेगा। इसमें किसानों के सवालों के जवाब देने के लिए 24/7 चैटबॉट भी होगा।
🔹 चुनौतियां और कार्यान्वयन रोडमैप
अधिकारी अंतिम छोर कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता में चुनौतियों को स्वीकार करते हैं। ग्राम-स्तरीय उद्यमियों (VLE) को किसानों की सहायता के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। पहला चरण जून 2024 में शुरू होगा, जिसका पूर्ण रोलआउट 2026 तक होगा। पहले दो वर्षों के लिए ₹20,000 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।