यूनेस्को के 193 सदस्य देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नैतिकता पर पहले वैश्विक समझौते को मंजूरी दे दी है। यह ढांचा पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवाधिकारों के संरक्षण के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसे आकार देने में भारत ने अहम भूमिका निभाई।
🔹 एक नज़र में ढांचा
'एआई की नैतिकता पर सिफारिश' तीन साल की वार्ता का परिणाम है। यह एआई प्रणालियों के विकास और उपयोग के लिए मूल्यों और सिद्धांतों का एक व्यापक सेट प्रदान करता है। मुख्य स्तंभों में शामिल हैं:
- आनुपातिकता और नुकसान न पहुँचाना: एआई का इस्तेमाल मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
- सुरक्षा: अवांछित नुकसान और कमजोरियों का समाधान किया जाना चाहिए।
- निष्पक्षता और गैर-भेदभाव: एआई में पूर्वाग्रह नहीं होने चाहिए।
- स्थिरता: एआई को पर्यावरण का सम्मान करना चाहिए।
- गोपनीयता और डेटा संरक्षण का अधिकार: व्यक्तियों का अपने डेटा पर नियंत्रण होना चाहिए।
- पारदर्शिता और व्याख्या योग्यता: एआई के निर्णय समझने योग्य होने चाहिए।
यूनेस्को महानिदेशक
"दुनिया को एआई से लाभ पहुँचाने के लिए नियमों की आवश्यकता है। यह सिफारिश एक प्रमुख उत्तर है - पहला वैश्विक मानक उपकरण। यह सुनिश्चित करेगा कि डिजिटल परिवर्तन मानवाधिकारों को बढ़ावा दे और एसडीजी की प्राप्ति में योगदान दे।" – ऑड्रे अज़ोले。
भारत का योगदान
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के नेतृत्व में भारत के प्रतिनिधिमंडल ने 'डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना' और 'ग्लोबल साउथ के लिए पहुंच' के इर्द-गिर्द समावेशी भाषा पर जोर दिया। अंतिम पाठ में जिम्मेदार डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के उदाहरण के रूप में भारत के यूपीआई और आधार के संदर्भ शामिल हैं। भारत ने एआई क्षमता निर्माण में विकासशील देशों के लिए विशेष प्रावधानों की भी वकालत की।
🔹 कार्यान्वयन और निगरानी
सिफारिश कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है लेकिन इसमें नैतिक वजन है। यूनेस्को प्रगति को ट्रैक करने के लिए एक 'एआई नैतिकता' वेधशाला स्थापित करेगा। सदस्य देशों को हर चार साल में अपने कार्यान्वयन पर रिपोर्ट देनी होगी। ढांचा राष्ट्रीय स्तर पर स्वतंत्र नैतिकता समितियों का भी आह्वान करता है।
उद्योग की प्रतिक्रिया
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और इंफोसिस सहित टेक दिग्गजों ने ढांचे का स्वागत किया है। 'पार्टनरशिप ऑन एआई' के एक संयुक्त बयान में कहा गया, "हम यूनेस्को के सिद्धांतों का समर्थन करते हैं और अपने आंतरिक एआई नैतिकता दिशानिर्देशों को इस वैश्विक मानक के साथ संरेखित कर रहे हैं।" हालांकि, कुछ नागरिक समाज समूहों का तर्क है कि ढांचे में प्रवर्तन तंत्र का अभाव है।
🔹 अगले कदम: सिद्धांतों से व्यवहार तक
यूनेस्को अब व्यावहारिक उपकरण विकसित करेगा:
- तैयारी आकलन पद्धति: देशों को उनकी एआई नैतिकता तैयारी का मूल्यांकन करने में मदद करने के लिए।
- नैतिक प्रभाव आकलन: एआई परियोजनाओं के लिए एक खाका।
- राष्ट्रीय एआई नैतिकता समितियाँ: स्थापना के लिए दिशानिर्देश।
भारत ने पहले ही नीति आयोग के तहत एक 'राष्ट्रीय एआई नैतिकता बोर्ड' स्थापित करने की घोषणा की है, जो यूनेस्को के ढांचे के अनुरूप होगा।
विशेषज्ञ की राय
"यह एक सॉफ्ट लॉ है, लेकिन यह एक शक्तिशाली मानदंड स्थापित करता है। देश और कंपनियाँ जो इसे अनदेखा करेंगी, उन्हें प्रतिष्ठा जोखिम का सामना करना पड़ेगा। अगली चुनौती इन सिद्धांतों को इंजीनियरों के लिए तकनीकी मानकों में बदलना है।" – डॉ. वंदना सिंह, एआई शोधकर्ता, आईआईटी दिल्ली।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य
यूनेस्को समझौता एआई विनियमन प्रयासों की बाढ़ के बीच आया है: यूरोपीय संघ का एआई अधिनियम (2024 अपेक्षित), अमेरिका का एआई बिल ऑफ राइट्स, और चीन के एआई नियम। यूनेस्को ढांचा अपनी सार्वभौमिकता और लैंगिक समानता एवं पर्यावरणीय स्थिरता पर जोर देने में अद्वितीय है।